इन 14 खाद्य पदार्थों के साथ एसिडिटी की समस्या का रोकथाम

इन 14 खाद्य पदार्थों के साथ एसिडिटी की समस्या का रोकथाम

एसिडिटी/अम्लता

एसिडिटी क्या है? हाजमे की समस्या एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट के ऊपरी भाग में जलन और दर्द अनुभव किया जाता है। यह जलन आमतौर पर खाना खाने के तुरंत बाद होती है। हाजमे की समस्या के मुख्य लक्षण हैं पेट के ऊपरी भाग में दर्द,भूख ना लगना,डकार आना तथा पेट में गैस होना। इस तकलीफ के दौरान मुंह में एक खट्टा स्वाद आ जाता है और पेट में काफी हलचल होती है जिसके बाद आमतौर पर कब्ज़ या दस्त की समस्या होती है।

आज समाज में एसिडिटी की समस्या काफी आम हो गयी है। यह समस्या तब होती है जब पेट में मौजूद एसिड एसोफैगस तक आ जाता है। इससे कई लोगों के दिल में भी जलन की समस्या होती है। एसिडिटी के लक्षणों,एसिडिटी की दवाई के बारे में हमें पता होना चाहिए। इस समस्या का पूरी तरह निदान करने की चेष्टा करनी चाहिए अन्यथा यह किसी बड़ी बीमारी में भी परिवर्तित हो सकती है। इस समस्या के फलस्वरूप एसोफैगस की रेखा भी नष्ट हो सकती है।

सभी पुरुषों की समस्या के लिए एक समाधान

गैस के लक्षण और बदहज़मी के लक्षण

 सीने में जलन –

सीने में जलन होने का मुख्य कारण आपके ईसोफेगस (esophagus) में पेट के एसिड का टकराना होता है। यह दर्द कई बार सामान्य से ज़्यादा समय तक भी रह सकता है।

भोजन करने के बाद दर्द –

कई बार अधिक भोजन कर लेने की वजह से पेट पूरी तरह भर जाता है, और अन्य कोई भी चारा ना होने की वजह से इस भोजन को ऊपर आना पड़ता है, जो बाद में बदहजमी की शक्ल ले लेता है।

मुंह में कड़वा स्वाद आना –

बदहजमी का यह भी एक मुख्य लक्षण है। इसका कारण पेट के एसिड का आपके गले तक पहुँच जाना है, जिसके फलस्वरूप आपका मुंह कड़वा हो जाता है।

कफ –

साँसों की कई बीमारियाँ, जैसे कफ और खांसी भी सीने में जलन की वजह से ही होती है, जिसका मुख्य कारण पेट के एसिड का आपके फेफड़ों तक पहुंचना है।

मुंह में अतिरिक्त थूक का भरना –

अगर आपके मुंह के अन्दर अचानक ही बिना किसी वजह से काफी मात्रा में थूक का उत्पादन होना शुरू हो जाए तो यह भी आपके पेट की बदहजमी की वजह से हो सकता है। बदहजमी होने पर हमारा शरीर इस अजीब द्रव्य को शरीर से निकालने का प्रयास करता है, और इसके लिए थूक का सहारा लेता है।

अपना कद बढाएँ

एसिडिटी से तुरंत राहत के उपचार

1. पेट में गैस का इलाज, आधा गिलास एलोवेरा का रस पिए।

2. 2 चम्मच सेब का सिरका पानी के साथ लेने से काफी असर करता है।

3. एसिडिटी की दवा, आधे कप पानी में 1 चम्मच बेकिंग सोडा भी काफी असरकारी उपचार है।

एसिडिटी से लड़ने के घरेलू उपाय

गुड़ –

अगर आपको खाने के बाद अम्लीयता की शिकायत हो रही है तो इसे दूर करने के लिए गुड़ का सेवन बहुत लाभकारी होता है. खाने के बाद थोडा गुड़ खाएं ऐसा करने से हाजमा भी बेहतर होता है और एसिडिटी की समस्या भी दूर होती जाती है.

एलोवेरा –

 

बहुत से लोगों को पता है कि एलोवेरा एसिडिटी के उपचार में काफी फायदेमंद सिद्ध होता है। अगर आप अपनी एसिडिटी की समस्या का स्थायी उपचार चाहते हैं तो रोज़ाना खाने से पहले एलोवेरा का रस पिए।

गोभी का रस –

बंद गोभी काफी आसानी से आपको बाज़ार में मिल जाएगी। एक कटी हुई गोभी को मिक्सर में डालें और इसका रस निकालें। अब एक गाजर को छोटे टुकड़ों में काटें और मिक्सर में डालकर इसका भी रस निकालें। आप या तो हर दिन गाजर का रस पी सकते हैं या फिर गोभी का रस भी प्रयोग में ला सकते हैं।

शहद –

jar of honey

शहद एक प्राकृतिक उत्पाद है और यह आसानी से सबके घरों में उपलब्ध भी होता है। क्योंकि शहद में कुछ औषधीय गुण भी होते हैं यह पेट की समस्याओं से निजात दिलाने में काफी असरकारी है। एसिडिटी के उपाय के रूप में भी शहद का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद होता है. रोज़ सोने के पहले 2 चम्मच शहद का सेवन करें।

अदरक –

यह रसोई में पाए जाने वाले मुख्य पदार्थों में से एक है। अदरक को पीसकर उसका रस निकालें। अब एक नींबू को काटकर उसका रस निकालकर उसे एक छोटे बर्तन में रखें और दोनों को अच्छे से मिला लें। अब इस मिश्रण का सेवन करें। इससे काफी फायदा मिलेगा।

पपीता –

पपीते में जो एंजाइम पाए जाता है उसे पपेन कहते हैं। यह शरीर में प्रोटीन को घोलने में काफी असरकारी है। आमतौर पर इसका सेवन भोजन करने के बाद किया जाटा है क्योंकि यह आपकी हाजमा शक्ति को बढ़ाता है। यह आसानी से आपके निकट के बाज़ार में उपलव्ध होता है। इसे खाने से कब्ज़ की समस्या से भी आराम मिलता है।

केला –

केला पोटैशियम से भरपूर होता है और पेट में एसिड उत्पन्न होने की क्रिया को नियंत्रित करता है एवं शरीर को अत्याधिक मात्रा में पेट में उत्पन्न होने वाले म्यूकस के हानिकारक परिणामों से बचाता है। केले में फाइबर होता है  यह हाज़मे की समस्या के निवारण में सहायता करता है। एसिडिटी से तुरंत राहत के लिए एक केला रोज़ खाएं।

तुलसी के पत्ते –

तुलसी के पत्ते पेट में म्यूकस के उत्पादन में सहायता करते हैं। यह पेट के हानिकारक रसों के प्रभाव से शरीर को बचाता है। अगर किसी को बेचैनी महसूस हो रही हो या पेट के ऊपरी भाग में जलन का अनुभव हो रहा हो तो उसे तुलसी के कुछ पत्ते खा लेने चाहिए।

ठंडा दूध –

ठंडा दूध पीने से बदहजमी के लक्षणों से आपको काफी आराम प्राप्त होगा। दूध कैल्शियम (calcium) से भरपूर होता है। यह आपके शरीर में एसिड बनने से रोकता है और पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को सोखने में मदद करता है। बिना चीनी डाले एक गिलास दूध पीने से बदहजमी से तुरंत राहत प्राप्त होती है। यह उपचार तब और भी ज़्यादा असरदार हो जाता है, अगर दूध में एक चम्मच घी का भी मिश्रण कर दिया जाए।

सौंफ –

यह हाजमे का एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो आँतों को साफ़ करने में भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिर्फ सौंफ चबाते रहने से ही आपको बदहजमी से छुटकारा मिल जाता है। एक और तरीका यह है कि रात में सौंफ को पानी के साथ उबालें और इस पानी को जमा करके रख दें। अगले दिन सुबह या शाम को इस पानी का सेवन कर लें।

जीरा –

जीरा आपके मुंह में थूक का उत्पादन करके आपके हाजमे में मदद करता है। यह शरीर के मेटाबोलिज्म (metabolism) में भी वृद्धि करता है और पेट की समस्याओं से निजात दिलाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का यह मानना है कि जीरे में एक आराम प्रदान करने वाला गुण होता है, जो आपको सीने में जलन से निजात दिलाता है। थोड़े से पानी में एक चम्मच जीरा मिश्रित करके इसका सेवन करें। वैकल्पिक तौर पर जीरा डालकर पानी को उबालें तथा इसके ठंडा होने के बाद इसका सेवन कर लें।

लौंग –

लौंग आपके हाजमे को दुरुस्त करने में काफी बड़ी भूमिका निभाती है और बदहजमी के लक्षणों को दूर करने में काफी कारगर भी सिद्ध होती है। लौंग में मौजूद पोषक तत्व पेट में मौजूद भोजन को आँतों तक धकेलने में काफी सहायता करते हैं। मुंह में एक लौंग लेकर इसे चबाएं तथा इसके रस को निगलकर बदहजमी से आराम पाएं।

इलायची –

आयुर्वेदिक शास्त्र के अनुसार शरीर के तीन मुख्य दोष होते हैं – वात, पित्त और कफ। इलायची में ऐसे गुण होते हैं, जो इन तीनों दोषों को ठीक करके नियंत्रित करने का कार्य बखूबी करने में सक्षम होते हैं। इलायची आपके हाजमे को दुरुस्त करने में काफी मदद करती है और पेट में उठ रही मरोड़ों से राहत प्रदान करता है। अगर आप पानी में इलायची डालकर इसे उबालें तथा इस पानी का सेवन करें, तो इससे आपकी बदहजमी चुटकियों में गायब हो सकती है।

पुदीना –

 

पुदीना आपके पेट में बनने वाले एसिड के उत्पादन की प्रक्रिया को धीमा करके हाजमे को दुरुस्त करने में काफी बड़ी भूमिका निभाता है। पेट में हो रहे जलन और दर्द को पुदीने के ठन्डे और आरामदायक प्रभाव के बल पर आसानी से दूर किया जा सकता है।

वजन कम करें

सबसे अच्छा और प्रभावी अम्लता उपचार – एसीकिल कैप्सूल

इस हर्बल अम्लता उपचार किसी भी प्रकार की अम्लता की समस्या से पीड़ित हैं, जो उन लोगों के लिए एक बहुत ही उपयोगी और दीर्घकालिक प्रभावी विकल्प बन जाता है। एसीकिल कैप्सूल फार्मेसी से अम्लता रोगियों को उपहार है, जिनके पास सबसे जटिल मुद्दों के उपचार के लिए आसान और सुरक्षित है प्राकृतिक उपचार। एसीकिल कैप्सूल तनाव को कम करने के लिए पेट में काम करता है और एसिड की अतिरिक्त मात्रा को रोकता है। एसिड के स्राव को नियंत्रित करने के अलावा, यह पाचन समारोह को गति देता है और एंटीसिड्स के स्राव को बढ़ावा देता है। यह प्राकृतिक तरीके से एसिड और गैस को हटाने में मदद करता है दवा के सुखदायक जड़ी बूटी पेट में शीतलता और स्थिरता लाते हैं और उपयोगकर्ता को ढीले और खट्टा स्वाद से राहत देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *