जानिये छोटी इलायची के बड़े-बड़े गुण

जानिये छोटी इलायची के बड़े-बड़े गुण

इलायची हर भारतीय घर की रसोई का अहम हिस्सा है, आम तौर पर मसालों की तरह इस्तेमाल में आने वाली इलायची, माउथफ्रेशनर के तौर पर भी भरपूर उपयोग में लायी जाती है। इलायची का वानस्पतिक नाम एलाट्टारिया कार्डोमोम है। वैसे तो इलायची को व्यंजनों में सुगंधदायक मसाले के तौर उपयोग में लाया जाता है लेकिन आदिवासी इसको भी औषधीय गुणों से भरपूर मानते हैं और अनेक नुस्खों में इसे इस्तेमाल भी करते हैं। हमारे हर्बल साइंस एक्सपर्ट डॉक्टर दीपक आचार्य ने हमें इलायची के कुछ ऐसे गुण बताए, जिन्हें जानकर हम दंग रह गए। आइये आपको भी बताएं छोटी इलायची के कुछ शानदार नुस्ख़ों के बारे में।images

1) पातालकोट के आदिवासी सफेद मूसली की जड़ों के चूर्ण के साथ इलायची मिलाकर दूध में उबालते हैं और पेशाब में जलन की शिकायत होने पर रोगियों को दिन में दो बार पीने की सलाह देते हैं। इन आदिवासियों के अनुसार इलायची शांत प्रकृति की होती है और ठंडक देती है।

2) पान के पत्ते में इलायची के दाने मिलाकर खाने से सर चकराना, घबराहट और जी मिचलाना जैसी शिकायतों में आराम मिलता है। उल्टी होने के बाद दो चार दाने इलायची के चबाने से मुँह का स्वाद बदलता है और राहत भी मिल जाती है।

3) पातालकोट में आदिवासी हर्रा के बीजों का चूर्ण (१ चम्मच), एक या दो इलायची का चूर्ण और थोडी सी अजवायन मिलाकर अपचन की समस्या होने पर रोगियों को देते है। माना जाता है कि यह नुस्खा पाचन प्रक्रिया का सुचारू करता है। इसे भी पढ़ें – जानिये ऐलोवेरा के नुकसान के बारे में

4) शहद में एक ग्राम इलायची का चूर्ण, स्वादानुसार काला नमक, घी और एक लौग को कुचलकर मिला लिया जाए और थोडे- थोडे अंतराल से चाटा जाए तो बरसात और ठंड में होने वाली खाँसी में तेजी से राहत मिलती है।

5) आदिवासियों के अनुसार पुरूषों में नपुंसकता दूर करने के लिए काली मूसली (५-१० ग्राम), बादाम (एक या दो), चिरौंजी के दाने (२ ग्राम) और तीन इलायची को मिलाकर कुचल लिया जाए और रोज रात सोने से पहले खाया जाए तो समस्या का समाधान आहिस्ता आहिस्ता होने लगता है।

6) डाँग- गुजरात में आदिवासियों के अनुसार तीन से चार इलायची, छुईमुई की जड़ें (२ ग्राम), सेमल की छाल (३ ग्राम) को आपस में मिलाकर कुचल लिया जाए और इसे एक गिलास दूध में मिलाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले पिया जाना चाहिए, यह शारीरिक दुर्बलता दूर करने के लिए एक कारगर फार्मुला है।

7) जिन्हें ज्यादा पेशाब होने की शिकायत होती है उन्हें विदारीकंद, लौंग और इलायची की समान मात्रा लेकर दिन में तीन बार चबाना चाहिए, माना जाता है कि पेशाब होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।

8) पेशाब से जुड़ी अनेक समस्याओं में राहत के लिए डाँग-गुजरात के आदिवासी मीठी नीम की जड़ों का रस तैयार करते हैं। रस की २० ग्राम मात्रा में दो चुटकी इलायची दानों का चूर्ण मिलाकर रोगियों को देते हैं, तेजी से आराम मिल जाता है।

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