डायबिटीज पर नियंत्रण करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपचार

डायबिटीज पर नियंत्रण करने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपचार

आमतौर सर्दी का मौसम डायबिटीज़ रोगियों के लिए बेहतर नहीं माना जाता है। ऐसे में शुगर लेवल को नियंत्रित रखना रोगी के लिए बड़ी चुनौती होती है, क्‍योंकि ठंड के मौसम में खुद की देखभाल कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है, इस मौसम में सर्दी, जुकाम और वायरल फीवर का खतरा ज्‍यादा रहता है। अगर साव‍धानियां ना बरती जाए तो हानिकारक साबित हो सकता है।

हालांकि ऐसी समस्‍या एक स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति के साथ भी हो सकती है। आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्‍स के बारे में बता रहें है, जिसके माध्‍यम से डायबिटीज के पेशेंट सर्दियों में भी खुद को फिट रख सकते हैं। इससे उनका शुगर लेवल नहीं बढ़ेगा।

क्‍या खाएं

  • डायबिटिक डाइट में ज्यादा फाइबर युक्त भोजन, जैसे छिलके सहित पूरी तरह से बनी हुई गेहूं की रोटी, जई इत्यादि जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट शामिल होनी चाहिए, क्योंकि वे खून के प्रवाह में धीरे-धीरे मिल जाते हैं। इस प्रकार इन्सुलिन उत्पादित ग्लूकोस का बेहतर ढंग से सामना कर सकती है।
  • गेहूं और जौ 2-2 किलो की मात्रा में लेकर एक किलो चने के साथ पिसवा लें। ऐसे चोकर सहित आटे की बनी चपातियां भोजन में खाएं। इसे अपने डाइट में अवश्य शामिल करें।
  • मधुमेह रोगियों के लिए आहार के अंतर्गत सब्जियों में करेला, मेथी, सहजन, पालक, तुरई, शलगम, बैंगन, परवल, लौकी, मूली, फूलगोभी, ब्रोकली, टमाटर, बंदगोभी, सोयाबीन की मंगौड़ी, जौ, बंगाली चना, पुदीना, हल्दी, काला चना, दालचीनी, फलीदार सब्जियां जैसे बीन्स, सैम फली, शिमला मिर्च, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां शामिल करें तथा इन सब्जियों से बने पतले सूपों का जितना चाहें उतना सेवन करें।
  • तुलसी के बीज, जैतून का तेल, अलसी, बादाम का भी बेहिचक सेवन करें।
  • मधुमेह में जामुन, नींबू, आंवला, टमाटर, पपीता, सिंघाड़ा, खरबूजा , कच्चा अमरुद, संतरा, मौसमी, ककड़ी ,चुकन्दर , मीठा नीम, बेल का फल, जायफल तथा नाशपाती को शामिल करें। आम ,पका केला ,सेब, खजूर तथा अंगूर में शुगर होता है, लेकिन क्योंकि फलों में फाइबर ज्यादा होता है इसलिए ये अच्छे शुगर की केटेगरी में आते है। जिनको हाई लेवल मधुमेह नहीं है वो इनको कम मात्रा में ले सकते है। इनका जूस बिल्कुल ना पियें क्योंकि उससे फाइबर निकल जाते है। आम की पत्तियों का सेवन भी लाभकारी है, इसके लिए 15-16 पत्तियों को एक कप पानी में उबाल लें और छान कर पियें

क्‍या ना खाएं

  • डायबिटिक डाइट प्लान में से घी और नारियल का तेल आदि चिकनाई युक्त चीजो को निकाल देना चाहिए। पूरी, कचौड़ी, समोसा, पकौड़े आदि खाने से भी बचना चाहिए।
  • गुड़, शक्कर, मिश्री, चीनी, शर्बत, मुरब्बा, शहद, पिज़्ज़ा, बर्गर, क्रीम रोल,आइसक्रीम तथा ठंडे पेय पदार्थ इस्तेमाल नहीं करने चाहिए।
  • डायबिटीज नियंत्रण करने वाली औषधियों के प्रयोग के दौरान डायबिटीज रोगी भोजन नहीं छोड़ना चाहिए।
  • चिकन को खाने से बचें। डायबिटीज के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे।
  • चावल और आलू का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए। खासतौर पर नए सफेद चावल न खाएं।
  • मैदे से बनी सफ़ेद रोटी (नान, तंदूरी रोटी ), नूडल्स, नाश्ते में अनाज, मीठे बिस्कुट, केक, मैगी, पास्ता, ज्यादा प्याज, टमाटर का मीठा सॉस, मीठी दही, परांठे, मैदे से बनी सफेद डबलरोटी एवं पेस्ट्री, कुलचे, बंद, कचौरी, चाट भी न खाएं। शराब, बियर, कॉफ़ी आदि पदार्थो का सेवन न करे।

सूर्य नमस्कार

डायबिटीज रोगियों के लिए यह योगा सबसे आसान और लाभकारी है। इस योगा को करने से रक्त का संचार शरीर में अच्छे से होता है। इस आसन को एक मिनट में 4 बार आराम-आराम से करना चाहिए।

आहार का रखें ख्‍याल

सर्दियों को वे लोग बेहद पसंद करते हैं, जिन्‍हें गर्मा गर्म खाना और ज्‍यादा खाना पसंद है। इस मौसम में आप जम कर खा सकते हैं। खाने के खूब सारे ऑप्‍शन सामने जो होते हैं। शायद यही वजह है कि लोग सर्दियों में हाई कैलरी चीजें खाने लगते हैं। डायबिटीज पीड़ितों को सही मात्रा में फल और सब्जियां खानी चाहिए। ज्‍यादा मीठे वाले फलों से परहेज करना चाहिए। इन महीनों में शराब का सेवन भी बढ़ जाता है, अच्छी सेहत के लिए उस पर भी सख्त नियंत्रण रखना चाहिए।

मानसिक तनाव से रहें दूर

मानसिक तनाव का आपकी बॉडी के शुगल लेवल पर सीधा असर पड़ता है। खासकर अगर वो कामकाज से जुड़ा हो तो। जर्मनी में हुआ एक अध्यायन बताता है कि ऐसे लोग जो कामकाज को लेकर बेहद तनाव में रहते हैं, उनमें टाइप टू डायबिटीज का खतरा 45 फीसदी तक बढ़ जाता है। इसलिए चीजों को अपने अंदर समेटना बंद करें और तनाव की हवा बीच-बीच में निकालते रहें।

देर रात तक काम करने से बचें

देर रात तक काम करने वाले लोग अन्यह के मुकाबले डायबिटीज के रिस्कन के दायरे में ज्या दा आते हैं। इसकी दो वजहें हैं, एक तो यह कि ऐसे लोगों की नींद अच्छीन नहीं होती। वे भले ही आठ घंटे की नींद ले लें, लेकिन वो नींद रात की गहरी नींद जैसी नहीं होती। दूसरी वजह यह है कि रात को जागने वाले लोग रोशनी के संपर्क में ज्या दा रहते हैं। रात को तो लाइट जलती ही है, दिन में खिड़कियों से आती रोशनी, मोबाइल, लैपटॉप, सेल फोन और टीवी वगैरा की रोशनी को भी वो एवॉइड नहीं कर सकते। इस सिलसिले में हुए कुछ शोध कहते हैं कि इनका असर इंसुलिन और ब्ल ड शुगर के लेवल पर पड़ता है। कुछ दिनों पहले कोरिया में हुआ एक अध्यरयन इसकी पुष्टि करता है।

डायबिटीज अब कम उम्र के लोगों को भी अपनी चपेट में लेने लगी है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके होने के बाद व्य क्ति को और भी दूसरी बीमारियां होने लगती हैं। अगर सही समय पर इलाज न हो, तो डायबिटीज पीडि़त धीरे-धीरे रोग का घर बन जाता है। डायबिटिक डाइट प्‍लान शुगर पर नियंत्रण रखने में काफी हद तक सहायक सिद्ध हो सकता है। एक डायबिटीज रोगी को अपने भोजन को चुनने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट कम से कम लेना चाहिए।

 

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