बढे वक्ष कम करने के आसन उपाय

बढे वक्ष कम करने के आसन उपाय

स्त्री की सुंदरता में स्त्री के वक्ष  का सुन्दर और सुडौल होना अति आवश्यक है। चेहरे के सुंदरता के साथ साथ सुन्दर और सुडौल स्तन का होना भी बहुत महत्व का है। स्त्री में आकर्षण का महत्वपूर्ण कारण सुन्दर और कठोर वक्ष हैं।  स्त्री के स्तन दो महत्वपूर्ण काम करते हैं, पहला शिशु को दुग्धपान कराना दूसरा कामेक्षा के लिए आकर्षण पैदा करना। स्तन न ज्यादा बड़ा होना चाहिए और न ज्यादा छोटा (“flat vision”) यह आपके शरीर और कद को अनुरुप होना चहिए।

स्तन के अनियमित आकर के कारण स्त्रियां असहज महसूस करती हैं। ओ चाह के भी अपने कुछ मनपसंद कपड़े नहीं पहन पाती , बजाय इसके उन्हें कुछ ढीले ढले लिबास में लिपटा रहना परता है। स्तनों के पूतना राक्षसी के आकार का होने के  कारण अपने सखियों में अपने को हीन महसूस करती हैं। यह हीं भावना उनके आत्मविश्वास को काम करता है, आत्मविश्वास की कमी उनके विकास में बाधक साबित होती है।

बढे वक्ष कम करने के आसन – सुन्दर और कठोर वक्ष

1.  वाल प्रेस ( Wall Press ) :

 

वाल प्रेस के अभ्यास से आपके स्तनों को एक सुन्दर आकर मिलता है जो आपके व्यक्तित्व को बढ़ता है।  बढे हुए वक्ष को कम करने के लिए ये अभ्यास बहुत ही कारगर सिद्ध होता है , साथ ही इससे स्तन सुडौल बनता है तथा इसमें कसाव आता है। इस अभ्यास को करने के लिए दीवार के सहारे खड़े हो जाएँ। अब अपने दोनों हाथो को दिवार के सहारे टिका कर हाथों के सहारे शरीर को पुश करें। इस योग अभ्यास से आपके बढे हुए स्तन का आकार धीरे धीरे घटने लगता है। इस अभ्यास से छोटे और क्षीण स्तन (“flat vision”) में भी लाभ मिलता है।

2. प्रार्थना स्थिति ( Prayer Pose ) :

 

प्रार्थना की अवस्था जैसा की नाम से ही स्पष्ट है। प्रार्थना की अवस्था में बैठना। पालथी मार कर पद्मासन की अवस्था में बैठ जाइये। अब अपने दोनों हथेलियों को जोड़कर अपने दोनों वक्षों के बीच में ले आइए। अब कुछ देर इस अवस्था में बैठिए। अपने शारीर को सीधे रखे और आपकी दृष्टि क्षैतिज किसी दीवार पर टिकनी चाहिए। इस आसन से आपके दोनों वक्ष पास पास आ जाते  है। अतः स्तनों के इस व्यायाम से इनके आकर में कमी करने में मदद मिलती है। यह asan अभ्यास  में जितना सहज है लाभ उतने ही अधिक हैं।

3. पुश अप ( Push Ups ) :

 

व्यायाम की इस क्रिया से स्तनों के आस पास के मांसपेशियों का सबसे जयादा खिचाव होता हो। परिणामतः स्तन सुन्दर सुदृढ़ और  सुडौल बनते हैं। इस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट जाएँ। अपने दोनों परों को एक दूसरे से सटा ले। अब अपने दोनों हथेलियों को अपने दोनों स्तनों के बगल में जमीं पर तक ले। दोनों हथेलियों के बीच में इतने का फासला रखे की पुश अप के समय आपकी शरीर आसानी से इसमें आ सके। अब अपने शरीर को हाथ के सहारे ऊपर उठायें।  इस अवस्था में २ से ३ सेकंड तक रहे। शुरू में आप ४ से ५ पुश अप से इस आसान का अभ्यास कर सकती हैं।  अभ्यस्त हो जाने पर धीरे धीरे पुश अप की संख्या को बढ़ा सकती हैं।

4.  अर्ध चक्रासन ( Half Moon Pose ) :

 

शरीर का वजन, मोटापा और पेट की समस्याओं को दूर करने वाला ये आसन महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह योगाभ्यास स्तनों के आकार को कम करता ही है. ढीले स्तानी को कठोर और सुदृढ़ बनाता है। अतः उस आसन का अभ्यास वो स्त्रियां भी कर सकती हैं जिनके स्तन का आकर तो सही है लेकिन स्तनों का ढीलापन उनके परेशानी का कारण है।  चक्रासन से थोड़ा आसान होने के कारण इस आसान को करने में आपको ज्यादा परेशानी नहीं होगी। आप जल्द ही इस आसान के अभ्यस्त हो जाएँगी।  इस आसान के लिए आप जमीं पर पीठ के बल लेट जाएँ।  अपने दोनों हाथो को सर के पीछे ले जाकर हथेलियों के बल दोनों हाथों को जमीन पर तक दें।  अब अपने पैरों और हथेलियों के मदद से अपने शारीर को ऊपर उठायें।  अपने पैरों और हाथों को मोड़ते हुए अपने शारीर को इस प्रकार उठाये की आपका शारीर एक अर्ध चन्द्र का रूप ले ले।

5. अष्टांग योगासन ( Asthanga Yogasan ) :

 

अष्टांग योग आसन वक्ष के आकार को काम करने के लिए सबसे पुराने समय से प्रचलित आसन है। इस आसन के अभ्यास की विधि थोड़ी कठिन है।  अतः इसका अभ्यास किसी योग गुरु के निगरानी में करना चाहिए। इस आसनके अभ्यास से बढे हुए स्तनों के आकर को क़म करने में निश्चित ही लाभ मिलता है।

6.  मेंढक मुद्रा ( The Frog Aasan )

 

अष्टांग योग आसन वक्ष के आकार को काम करने के लिए सबसे पुराने समय से प्रचलित आसन है। इस आसन के अभ्यास की विधि थोड़ी कठिन है।  अतः इसका अभ्यास किसी योग गुरु के निगरानी में करना चाहिए। इस आसनके अभ्यास से बढे हुए स्तनों के आकर को क़म करने में निश्चित ही लाभ मिलता है।

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