मधुमेह रोगियों के लिए 10 योग आसन

मधुमेह रोगियों के लिए 10 योग आसन

मधुमेह यानि डायबिटीज (Diabetes) की बीमारी इन दिनों सामान्य हो चली है। शरीर में इंसुलिन की कमी होने लगे या इस हार्मोन के बनने में अनियमितता हो तो व्यक्ति को डायबिटीज होती है। इंसुलिन ठीक प्रकार से नहीं बनने के कारण हृदय, किडनी, उच्च रक्तचाप और आंखों की समस्या होती हैं। इससे पूर्ण रूप से छुटकारा पाने में योग पूर्ण रूप से सहायक है।

मेडिकल साइंस ने भी इसकी पुष्टि की है कि योग के बेहद फायदे हैं। कुछ योग आसनों (Yoga poses) के प्रभाव से पैनिक्रियाज के बीटा सेल्स (Beta Cells) तक रक्त प्रवाह बढ़ जाता है, कोशिकाओं को ज्यादा ऑक्सीजन मिलता है, और मृतपाय: बीटासेल्स में नयी ऊर्जा आती है ताकि वहां से ज्यादा इंसुलिन स्त्रावित हो सके। योग के आसनों से इंसुलिन की संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है।

डायबिटीज में योग

रोजमर्रा की जिंदगी में योग को अपनाया जाए तो ब्लड में शुगर की मात्रा कम हो जाती है जिससे डायबिटीज से छुटकारा मिल सकता है। इसके साथ ही निम्न रक्तचाप और वेट कंट्रोल करने में भी सहायता मिलती है। टेंशन या स्ट्रेस (Tension or Stress) डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण है। आइए जानते हैं योग के कुछ आसन के बारे में, जिनसे डायबिटीज में तो फायदा होता ही है साथ ही कुछ अन्य बीमारियों में भी आराम मिलता है।

1. प्राणायाम (Pranayama)

 धीरे धीरे सांस लेना और छोड़ना, इससे रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा जाती है जिससे रक्त संचार (Blood Circulation) सुधरता है। इसके अलावा थका मस्तिष्क भी सुचारू रूप से कार्य करने लगता है।

2. सेतुबंधासन (Setu Bandhasana)

इससे न केवल ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है बल्कि मस्तिष्क शांत रहता है और पाचन शक्ति सुचारू होती है। महिलाओं में मेनोपॉज की स्थिति में भी आराम मिलता है।
नोट- गर्दन या कमर में इंजरी हो तो न करें

3. बालासन (Balasana)-

बच्चों के बैठने की अवस्था जैसा लगने वाला यह योग स्ट्रेस बूस्टर है। इससे जांघ और घुटनों आदि में खिंचाव होता है जो स्ट्रेस को कम करता है साथ ही कमर के नीचे के हिस्से में होने वाले दर्द के लिए भी रामबाण है।
नोट- यदि आप प्रेग्नेंट हैं, घुटने में कोई इंजरी है या डायरिया है तो इसे न करें।

4. वज्रासन (Vajrasana)

इस योगासन द्वारा भी टेंशन को कम किया जाता है और पाचन क्रिया में सुधार होता है।

5. सर्वांगासन (Sarvangasana)

इस योगासन के द्वारा थायराइड ग्लैंड सुचारू काम करते हैं। यह ग्लैंड ही पूरे शरीर के सुचारू रूप से काम करने, पाचन, नर्वस रिप्रोडक्टिव सिस्टम, मेटाबॉलिज्म तथा रेस्पोरेटिव सिस्टम के ठीक ढंग से काम करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
नोट- गर्दन या स्पाइनल इंजरी होने की स्थिति में इसे न करें। साथ ही हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तब भी एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें।

6. हलासन (Halasana)

जो लोग लंबे समय तक दफ्तरों में बैठ कर काम करते हैं और बैठने या चलने का पोश्चर बिगड़ गया है ऐसे लोगों के लिए यह आसन है। यह थायराइड ग्लैंड, पैराथायराइड ग्लैंड, एबडोमिनल ऑर्गन आदि में रक्त संचार को दुरूस्त रखता है।
नोट- यदि आप हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं या आपको डायरिया और पीरियड चल रहे हैं तो इस आसन को न करें

7. धनुरासन (Dhanurasana)

यह आसन कमर को मजबूत बनाता है। स्ट्रेस को कम करता है तथा माहवारी के दर्द को भी कम करता है।
नोट- यदि हाई या लो ब्लड प्रेशर है तो इस आसन को न करें। इसके अलावा माइग्रेन, हर्निया, गर्दन में चोट, सिर दर्द, या कोई पेट संबंधी सर्जरी हुई है तब भी इसे न करें

8. चक्रासन (Chakrasana)

स्पाइन को स्ट्रेच करने और मसल्स को आराम देने के लिए सर्वोत्तम आसन है। इसके अलावा मस्तिष्क को भी रिलेक्स करता है।
नोट- कोई स्पाइनल इंजरी हो ता न करें

9. पश्चिमोत्सासन (Paschimottanasana)

इस योगासन से रक्त चेहरे की तरफ बहता है। इसके साथ ही पेट की सभी क्रियाओं को सुचारू करता है। जांघों की मसल्स को मजबूत करता है तथा बाँहों और कमर में आराम मिलता है।
नोट- कमर दर्द या स्पाइनल समस्या हो तो इसे न करें

10. अर्धमतस्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana)

फेफड़ों के काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। साथ ही कमर को भी आराम मिलता है।
नोट- कोई बैक इंजरी हो तो इसे न करें

ध्यान रखें-
1- हमेशा खाली पेट योग करें
2- यदि शाम में आसन या प्राणायाम करना हो तो करीब 4 घंटे पहले से कुछ न खाएं
3- ढीले, हल्के व आरामदायक कपड़े पहनें
4- वायु यदि दूषित हो तो आसन न करें

यूं मिलेगा योग का पूरा लाभ-
– सही ढ़ंग और मुद्रा का रखें ध्यान
– पर्याप्त समय तक करें
– ध्यान एवं मंत्रों के साथ पॉजिटिव सोच से किया गया योगासन ज्यादा लाभकारी होता है

इन्हें भी आजमाएं-

मधुमेह बचाव के लिए विशिष्ट योग और उन्हें करने की अवधि
सूर्य नमस्कार – 6 राउंड
ताड़ासन – 2 से 3 मिनट
मतस्यासन – 2 मिनट
गोमुखासन – 2 मिनट
अर्धमत्यासेन्द्रासन – 1 मिनट
धनुरासन – 1 मिनट
मंडुकासन – 5 बार
शशांकासन – 5 मिनट
भसिका – 2 मिनट
कपालभांति – 10 मिनट
अनुलोम विलोम – 10 मिनट
भ्रामरी – 5 बार
शवासन – 5 से 10 मिनट

 

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