शीघ्रपतन रोकने के घरेलू उपाय

शीघ्रपतन रोकने के घरेलू उपाय

शीघ्रपतन क्या है ? 
पुरुष की इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित हो जाए, स्त्री सहवास करते हुए संभोग शुरू करते ही वीर्यपात हो जाए और पुरुष रोकना चाहकर भी वीर्यपात होना रोक न सके, बीच में अचानक ही स्त्री को संतुष्टि व तृप्ति प्राप्त होने से पहले ही पुरुष का वीर्य स्खलित हो जाना या निकल जाना, इसे शीघ्रपतन होना कहते हैं। इस व्याधि का संबंध स्त्री से नहीं होता, पुरुष से ही होता है और यह व्याधि सिर्फ पुरुष को ही होती है।

शीघ्र पतन की सबसे खराब स्थिति यह होती है कि सम्भोग क्रिया शुरू होते ही या होने से पहले ही वीर्यपात हो जाता है। सम्भोग की समयावधि कितनी होनी चाहिए यानी कितनी देर तक वीर्यपात नहीं होना चाहिए, इसका कोई निश्चित मापदण्ड नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति पर निर्भर होता है।
शीघ्रपतन की समस्या का असर व्यक्ति की लाइफ पर देखने को मिलता है। इस समस्या के चलते व्यक्ति अपने लाइफ पार्टनर या प्रेमिका को सेक्स संतुष्टि नहीं दे पाता। इससे नाजायज संबंध भी बन जाते हैं, जिसकी परिणति कई बार परिवार के टूटने के रूप में भी होती है।

क्यों होता है शीघ्र पतन ?

1. अत्यधिक हस्मैथुन करने से शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक का सेट हो जाना। इसके कारण व्यक्ति (पुरुष) को क्लाइमेक्स पर पहुंचने की जल्दी होती है तथा वह शीघ्रातिशीघ्र आनंद की अनुभूति करना चाहता है।
2. सेक्स के बारे में अत्यधिक सोचना भी शीघ्रपतन के लिए जिम्मेदार होता है। सेक्स फैंटेसी या पोर्न फिल्म देखने से भी व्यक्ति अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है और जल्दी ही स्खलित हो जाता है।
3. अल्कोहल एवं डायविटीज की वजह से उत्पन्न न्यूरोपैथी की वजह से भी शीघ्रपतन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
4. सेक्स के शुरुआती दिनों में भी इस तरह की समस्या पैदा हो जाती है।
5. नया पार्टनर होने की स्थिति में भी जल्दी वीर्य स्खलित हो सकता है।
6. शीघ्र स्खलन इस पर भी निर्भर करता है कि उत्तेजना देने का तरीका कैसा है।
7. ऑरल सेक्स से भी व्यक्ति जल्दी डिस्चार्ज हो सकता है।

जब आप शीघ्रपतन से पीड़ित हों, तो यह ध्यान में रखना बहुत जरूरी है कि वह हर स्थिति में इलाज से ठीक हो जाता है और इसके सबसे गंभीर मामले भी लाइलाज नहीं हैं। इस समस्‍या को भी एक आम शारीरिक परेशानी की तरह लें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप शांत रहते हुए समस्या का तुरंत इलाज कराएं। आम तौर पर बिना इलाज कराए आप जितना अधिक समय बिताएंगे, समस्या उतनी ही उलझती जाएगी और उसका इलाज उतना ही कठिन होता जाएगा। शीघ्रपतन सभी पुरुषों को एक ही जैसे पीड़ित नहीं करता है। जो व्यक्ति स्त्री योनी में प्रवेश करने के पूर्व वीर्य स्खलन करता हो, और जो व्यक्ति संभोग क्रिया के पूरा हो जाने बाद वीर्य स्खलन करता हो, दोनों में एक ही प्रकार की समस्या नहीं है। इसलिए शीघ्रपतन का इलाज भी अलग-अलग होता है और वह शीघ्रपतन के प्रकार के अनुरूप होता है। अगर शीघ्रपतन के अलग-अलग लक्षणों के आधार पर मरीज का इलाज किया जाए तो बीमारी पर बहुत हद तक काबू पाया जा सकता है। 

 शीघ्रपतन रोकने के घरेलू उपाय

  •   मुलहठी के बारीक चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में घी और शहद से साथ चाटकर ऊपर से दूध पीने से  संभोग शक्ति बहुत तेज होती है ।
  •      लगभग 250 ग्राम शतावरी घृत में इतनी ही मात्रा में शक्कर, 5 ग्राम छोटी पीपल और 5 चम्मच
  •      शहद मिला लें। इस मिश्रण को 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से    संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।
  •      अदरक का रस 6 ग्राम, सफेद प्याज का रस 10 ग्राम, 5 ग्राम शहद, गाय का घी 3 ग्राम, सबको एक  साथ मिलाकर रोजाना चाटें एक मास तक इससे हर तरह की मर्दाना ताकत बढ़ती है।
  •  भिंडी से बना पाउडर, प्रिमेच्यूर ईजॅक्युलेशन मे रामबन होता है. इसके 10गम पाउडर को ले और एक गिलास मिल्क मे घोलकर पी जाए. आप चाहे तो इसमे 2 स्पून शुगर भी डाल सकते है. ऐसा रोज़ 1 महीने तक करे, आपको ज़रूर लाभ मिलेगा l
  •     मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।
  •     कौंच के बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए। इसके बाद   बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

 शीघ्रपतन का इलाज

प्रकृति ने किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए हमें शक्तिशाली जड़ी बूटियां प्रदान की है , जिनको हम घास-फूस समझते हैं। प्राचीन काल से इन्ही जड़ी बुटियों के द्धारा इलाज किया जाता रहा है और हमारे पूर्वज इन्ही का प्रयोग करते थे तब तक किसी रसायन की खोज नहीं हुई थी और लोग जड़ी-बूटियों के प्रयोग से स्वस्थ रहते थे और दीर्घ आयु होते थे। चिकित्सा के रूप निरन्तर परिवर्तन होते रहे और आज चिकित्सा में रसायन का प्रयोग किया जाता है ये रसायन तुरंत उपचार करने में सक्षम हो सकते है परन्तु यह रसायन हमारे शरीर के अन्य भागो पर बुरा प्रभाव डालते है अतः अब लोग चिकित्सा के पुराने तरीको और दवाओं को मान्यता दे रहें है और भारत भूमि तो इन दवाओं के प्राप्त करने का मुख्य केन्द्र है पुरे विश्व में आज भारत में पाई जाने वाली इस अदभुत दवाओं का प्रयोग विदेशों में भी किया जाने लगा है। Venus Ayurveda इन दवाओं के प्रयोग के लिए भारत में नहीं बल्कि विश्व में जाना जाता है।

 

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