शुक्राणु बढ़ाने के घरेलू उपाय

शुक्राणु बढ़ाने के घरेलू उपाय

स्वस्थ और भरपूर शुक्राणु (sperms) होना किसी भी आदमी के लिए बहुत जरुरी होता है। जब 1 ml वीर्य के sample में कम से कम 15 million sperms होते हैं तब इन्हें स्वस्थ शुक्राणु माना जाता है। इसके साथ ही sperms का structure और mobility भी normal होना जरुरी होता है।

यदि यह healthy न हों तो इन्सान को नपुंसकता, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष , असंतुष्टि और sexual desire में कमी जैसी समययों का सामना करना पढ़ता है। इसलिए अस्वस्थ शुक्राणु आपकी sexual life को बुरी तरफ से damage कर सकते हैं और आपकी काम वासना को बहुत हद तक खत्म कर सकते हैं।

शुक्राणुओं को healthy बनाने के लिए आपको अपनी lifestyle में थोड़े से changes लाना बहुत ही जरुरी है। अपने सुना तो होगा ही एक स्वस्थ शरीर ही खुशहाल जीवन का आधार होता है। इसलिए नीचे दी गई कुछ healthy lifestyle tips को अपनाकर अपने sperm count बढ़ाएं और अपनी sex life में खुशहाली लायें

शुक्राणु बढ़ाने के उपाय –

उचित भोजन का सेवन करें

यदि आप नपुंसकता से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खान-पान को ठीक करें। अत्यधिक मात्रा में तला-भुना खाना, junk foods, तेलिय पदार्थों से लैश खाना खाने से सबसे बुरा असर reproductive system को ही होता है। आजकल कई लोग बाजार में junk foods का अत्यधिक सेवन करते हैं जिसके कारन नपुंसकता और erectile dysfunction की समस्या काफी ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए इस गंभीर समस्या से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा vitamin और fiber युक्त फलों और सब्जियों का ही सेवन करें।

नियमित योग और व्यायाम करें

कम उम्र में ही sperm count कम होने का सबसे बढ़ा करण होता है आलस्य से भरपूर जीवन और व्यायाम की कमी। व्यायाम न करने से शरीर में खून का प्रभाह ठीक से नहीं होता जिससे वो सभी अंगों तक oxygen की उचित मात्रा को नहीं पहुंचा पाता। Sexual organs को ठीक से काम करने के लिए अत्यधिक oxygen की जरुरत होती है जो उन्हें नहीं मिल पाती, इसके फलस्वरूप शीघ्रपतन, नपुंसकता और कामुकता में कमी जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।

इसलिए अपनी दिनचर्या में योग और व्यायाम को जरुर शामिल करें। रोज सुबह जल्दी उठें और खुली हवा में walk करें।

धूम्रपान और शराब का कम सेवन करें

एक शोध के अनुसार धूम्रपान के कारण फेफडों की नालियां जाम होने लगती हैं, जिसके फलस्वरूप खून में उचित मात्रा में oxygen नहीं पहुँच पाती और अंगों को उचित मात्रा में oxygen नहीं मिलती। जैसे कि ऊपर बताया गया है, यदि oxygen की कमी का सबसे बुरा असर reproductive organs को ही होता है। उसी तरह अत्यधिक शराब के सेवन से भी sperms के production में कमी आती है। इसलिए इनका सेवन कम करें और यदि हो सके तो बिलकुल भी न करें।

दूध और केसर

दूध और केसर शीतकाल में 250 ग्राम औटाये हुए दूध में चार-पांच केसर की पंखुड़ियां अच्छी तरह मिलाकर, मिश्री डालकर, यह दूध प्रात: या रात सोने से पहले पिया जाय तो पुरुषत्व शक्ति में खूब वृध्दि होती है। स्फूर्ति आती है। खून का दौरा बढ़ता है। शरीर की रंगत निखरती है। प्रभाव की द्रष्टि से अत्यंत कामोद्दीपक, उत्तेजिक और बाजीकरण है। इसके सेवन में सर्दी का प्रभाव भी कम पड़ता है। सर्दी से बचाव हो और हाथ-पांव बर्फ की तरह ठंडे होना मिटता है।

बथुआ

बथुआ का शाक हरे पत्ते के शाको में सर्वाधिक गुणकारी है। बथुआ शुक्र की वृध्दि करता है। रक्त की शुध्दि करता है। स्मरण शक्ति तेज करता है। आमाशय को बल प्रदान करता है। कब्जनाशक और जठराग्निवर्धक है। गर्मी में बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। पथरी से बचाव करता है। इसे जब तक हरा मिले, हरा सेवन करना चाहिए अन्यथा सुखाकर रख लें। इसको पीसकर अथवा इसके कतरन आटे में गूंधकर रोटी बनाकर खाना भी लाभप्रद है।

तुलसी के बीज

तुलसी के बीज आधा ग्राम (पीसे हुए), पान के साथ सादे या केवल कत्था चुना लगाये पान के साथ नित्य सुबह एवं शाम खाली पेट खाने से वीर्य पुष्टि एवं रक्त शुध्दि होती है।

विशेष

1. जो लोग पान नही खाते, वे एक भाग तुलसी के बीज का चूर्ण को दो भाग पुराने गुड में मिलाकर ले सकते है।

2. आवश्यकता अनुसार दस से चालीस दिन तक लें। साधारणतया आठ-दस दिनों का प्रयोग पर्याप्त रहता है। अधिक से अधिक चालीस दिन तक प्रयोग किया जा सकता है।

3. तुलसी के बीज अत्यंत उष्ण होने के कारण यह प्रयोग केवल शीतकाल में ही किया जाना चाहिए।

4. इश्तहारी पौरुष बलवर्धक ओषधियों के पीछे भागने वाले यदि नपुंसकत्व रोग-नाशक तुलसी के बीजों का उक्त प्रयोग करें तो पांच सप्ताह में ही उनकी चिंता दुर हो सकती है।

5. इसके अतिरिक्त गैस कफ से उत्पन्न होने वाले अनेक रोग मिट जाते है।

परहेज

1. तेल और तली चीजें, अधिक लाल मिर्च, मसालेदार पदार्थ, इमली, अमचूर, तेज खटाईयां व आचार।

2. प्रयोग काल में घी का उचित सेवन करना चाहिए।

3. पेट की शुध्दि पर भी ध्यान देना चाहिए। कब्ज नही होने देनी चाहिए। कब्ज अधिक रहता हो तो प्रयोग से पहले पेट को हल्के दस्तावर जैसे त्रिफला का चूर्ण एक चमच अथवा दो-तीन छोटी हरड़ का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ, सोने से पहले अंतिम वास्तु के रूप में लें।

4. सेवन-काल में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।

5. ओषधि सेवन के आगे-पीछे कम से कम दो घंटे कुछ न खाएं। खाली पेट सेवन से यह मतलब है।

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